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18 September, 2017

आख़िर कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान

हाल ही में भारत के बोधगया में हुए बम विस्फोटों के बाद रोहिंग्या मुस्लिम सुर्खियों में हैं, लेकिन प्रश्न यह भी है कि आखिर रोहिंग्या हैं कौनम्यांमार को क्या दिक्क़त है? इन्हें अब तक नागरिकता क्यों नहीं मिली? रोहिंग्या मुसलमान विश्‍व का सबसे अल्‍पसंख्‍यक समुदाय है। इनकी आबादी करीब दस लाख के बीच है। बौद्ध बहुल देश म्यांमार के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमान शताब्दियों से रह रहे हैं। बीते दिनो म्‍यांमार में हुई हिंसा में रोहिंग्‍या मुसलमानों के मारे जाने के बाद पूरे विश्‍व की नजरे इन पर आ गईं हैं। यह सुन्नी इस्लाम को मानते हैं। इन मुसलमानों के बारे में कहा जाता है कि वे मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं। सरकार ने इन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है। ये म्यामांर में पीढ़ियों से रह रहे हैं। रोहिंग्या मुसलमानों को बिना अधिकारियों की अनुमति के अपनी बस्तियों और शहरों से देश के दूसरे भागों में आने जाने की इजाजत नहीं है। यह लोग बहुत ही निर्धनता में झुग्गी झोपड़ियों में रहने के लिए मजबूर हैं। पिछले कई दशकों से इलाके में किसी भी स्कूल या मस्जिद की मरम्मत की अनुमति नहीं दी गई है। नए स्कूल, मकान, दुकानें और मस्जिदों को बनाने की भी रोहिंग्या मुसलमानों को इजाजत नहीं है। म्यांमार में 25 अगस्त को भड़की हिंसा में क़रीब 400 मौतों की ख़बर है म्यांमार में बौद्ध बहुसंख्यक हैं और ये रोहिंग्या को अप्रवासी मानते हैं। साल 2012 में म्यांमार के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या-बौद्धों के बीच भारी हिंसा हुई थी साल 2015 में भी रोहिंग्या मुसलमानों का बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हुआ, रोहिंग्या समुदाय 12वीं सदी के शुरुआती दशक में म्यांमार के रखाइन इलाके में आकर बस तो गया, लेकिन स्थानीय बौद्ध बहुसंख्यक समुदाय ने उन्हें आज तक नहीं अपनाया है।

अराकान रोहिंग्या नेशनल ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक रोहिंग्या रखाइन में प्राचीन काल से रह रहे हैं। 1824 से 1948 तक ब्रिटिश राज के दौरान आज के भारत और बांग्लादेश से एक बड़ी संख्या में मजदूर वर्तमान म्यांमार के इलाके में ले जाए गए। ब्रिटिश राज म्यांमार को भारत का ही एक राज्य समझता था इसलिए इस तरह की आवाजाही को एक देश के भीतर का आवागमन ही समझा गया। ब्रिटेन से आजादी के बाद, इस देश की सरकार ने ब्रिटिश राज में होने वाले इस प्रवास को गैर कानूनी घोषित कर दिया। इसी आधार पर रोहिंग्या मुसलमानों को नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया। जिसके चलते अधिकांश बौद्ध रोहिंग्या मुसमानों को बंगाली समझने लगे और उनसे नफरत करने लगे।

भारत में करीब 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान हैं, जो जम्मू, हैदराबाद, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में मौजूद हैं।  चूंकि भारत ने शरणार्थियों को लेकर हुई संयुक्त राष्ट्र की 1951 शरणार्थी संधि और 1967 में लाए गए प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं इसलिए देश में कोई शरणार्थी कानून नहीं हैं । गौरतलब है कि भारत सरकार रोहिंग्या मुस्लिमों को शरण देने से इनकार कर रही हैसरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि, "रोहिंग्या मुसलमान देश की सुरक्षा के लिए खतरा है और इस समुदाय के लोग आतंकी संगठनों से भी जुड़े हो सकते हैं"हालांकि, कोर्ट से सरकार ने इसे होल्ड करने की अपील की है

एम के पाण्डेय निल्को
रिसर्च स्कॉलर, जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी 

02 September, 2017

....या फिर तुम्हारी यादें



तुम या फिर तुम्हारी यादें

जब जब आती है
एक सुखद एहसास मेरे मन को
छू कर भाग जाती है
भाग जाती है
क्योकि
वो रुक नही सकती
और मैं उसे
रोक नही सकता
उस क्षणिक समय में
खो जाते है
हम दोनों 
जी हाँ , सही सुन रहे है
हम दोनों
मैं और मेरी तन्हाइयां
क्योंकि यही तो साथ देती है
पहले से थी और 
बाद तक साथ रहेगी
यही तो है जो अपना है
जो साथ है
जो साथ रहेगा 
सुनाऊंगा किसी रोज
एक दूसरा किस्सा
जिसका तू ही होगा एक हिस्सा
मेरी खामोशियों को न तोड़ो
भादो का महीना है
वर्षा से कही आफत है तो
कही राहत है
क्या सुनाऊ
क्या लिखूं
सोच रहा हूँ यही छोड़ 
देता हूँ जो है
वो किस्मत के 
भरोसे
या करे संघर्ष 
मिलते है इस आधी अधूरी
बिना सिर पैर की
रचना के बाद
-
एम के पाण्डेय निल्को

30 August, 2017

Junior Dr Kumar Vishwas


18 August, 2017

तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आजादी दूंगा

स्वतंत्रता अभियान के एक और महान क्रान्तिकारियो में सुभाष चंद्र बोस  का नाम भी आता है, नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने भारतीय राष्ट्रिय सेना का निर्माण किया था. जो विशेषतः “आजाद हिन्द फ़ौज़” के नाम से प्रसिद्ध थी.
“तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आजादी दूंगा” सुभाष चंद्र बोस का ये प्रसिद्ध नारा था, उन्होंने अपने स्वतंत्रता अभियान में बहुत से प्रेरणादायक भाषण दिये और भारत के लोगो को आज़ादी के लिये संघर्ष करने की प्रेरणा दी.

11 August, 2017

कौन है यह चोटीकटवा ? जानें पूरा सच...!

बीते कई दिनों से चर्चाओं में आए चोटी कटवा को लेकर हर कोई सच्चाई जानना चाहता है । हर कोई जानना चाहता है कि आखिर क्या है चोटी कटवा?  इसको लेकर बड़े-बड़े टीवी चैनलों से लेकर अखबारों और वेब मीडिया में भी सुर्खियां बनी हुई है । तो वही सरकार से लेकर पुलिस प्रशासन भी चोटी कटवा को लेकर हैरान है, और जानना चाहता है कि आखिर क्या है चोटी कटवा? सर्च करने पर पता चला कि राजस्थान से शुरू हुई चोटी कटवा की कहानी अब दिल्ली, गुडगांव, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित अलग-अलग जगहों से भी आ रही हैं, समझ आया कि मसला मास हिस्टीरियाका है ।
राजस्थान के एक छोटे से गांव से शुरू हुई चोटी कटवा की कहानी अब दिल्ली हरियाणा चंडीगढ़ पंजाब होते होते देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश जा पहुंची है। यहां के मथुरा, आगरा, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, देवरिया समेत कई शहर चोटी कटवा से दहशत जदां है । यहां के कई गांवों से चोटी कटवा नाम की अफवाह से सनसनी मची हुई है । इससे सबसे ज्यादा दहशत में महिलाएं हैं, और अपनी चोटी बचाने को लेकर हैरान हैं। क्योंकि उसकी किसी ना किसी पड़ोसी गांव में या पड़ोसी की चोटी कट गई है , और अब वह भी दहशत में है। सच तो यह है कि 2017 में भी हम ऐसे हैं कि हमारे बीच मास हिस्टीरिया फैलाना बहुत आसान है।  आप सोचिए कि कौन सा भूत ऐसे लोगों की चोटी काटते फिरेगा?  कैमरे के सामने आने के लिए क्या लोग ये नहीं कर सकते?  या फिर बस डर के मारे?  मैं नहीं कह रहा कि ऐसा ही है, पर ऐसा भी हो सकता है। यूजीन इनस्को (फ्रेंच लेखक) की किताब राइनोसोर्स  की कहानी याद आ गई, ऐसा होता है कि एक आदमी शहर में राइनोसोर्स बन जाता है, फिर दूसरा, फिर तीसरा, और धीरे-धीरे बाकी सब। ये चोटीकटवा की कहानी कुछ ऐसी ही लगती है. इसके कई तर्क हो सकते हैं,  पब्लिसिटी,  धार्मिक संवेदना फैलाना,  मास हिस्टीरिया फैलाना। कुछ भी हो सकता है, मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि हम जरा सोचे कि कहीं हम सब राइनोसोर्स तो नहीं बन रहे?
अपने आसपास के माहौल में अफवाहों की चपेट में आकर लोग एक्यूट साइकोसिस (मेनिया) की जद में आकर मास हिस्टीरिया का शिकार हो रहे हैं। इसमें कोई अंजान डर एक से दूसरे में पहुंचकर अफवाहों को बढ़ावा देता है। मास हिस्टीरिया की उन जगहों पर होने की आशंका ज्यादा रहती है जहां परिवार या समाज में भावनात्मक तौर पर एक दूसरे से जुड़े होते हैं। इसमें पीड़ित को देखकर परिवार या अन्य आसपास के सदस्य खुद को उसी में ढालने की कोशिश करते हैं।  मास हिस्टीरिया एक सामान्य समस्या है। इसमें यदि एक बच्चा शिकायत करता है कि उसे पेट दर्द हो रहा है तो अन्य बच्चों को भी लगता है कि उनके साथ भी वैसा ही हो रहा है। जबकि वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं होता। हिस्टीरिया (Hysteria) की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। बहुधा ऐसा कहा जाता है, हिस्टीरिया अवचेतन अभिप्रेरणा का परिणाम है। अवचेतन अंतर्द्वंद्र से चिंता उत्पन्न होती है और यह चिंता विभिन्न शारीरिक, शरीरक्रिया संबंधी एवं मनोवैज्ञानिक लक्षणों में परिवर्तित हो जाती है। 
-
एम के पाण्डेय निल्को
शोध छात्र 

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