25 December, 2011

दे बधाई तुम्हें

बधाई !!
एक शब्द, एक संवाद, एक एहसास,
जो महका करेगा महफ़िल में,
हम रहे या ना रहे रस्ते में,
यही आवाज़ गूंजेगी दिल में-
"तारो की चमक, फूलों की रंगत मिले,
हर मोड़ पर तुमको मोहब्बत मिले...
और महका करे मौजूदगी से आपकी फिजा,
ज़मी पे आपको रौनक-ए-जन्नत मिले..."
और खामोश सदाओं में भी गूँज उठे एक सदा...
जैसे कि शहनाई-
बधाई !! बधाई !! बधाई..........


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