29 January, 2012

पवनपुत्र हनुमान वायुमार्ग से

यूं तो पवनपुत्र हनुमान स्वयं हवा से बातें करते हैं, लेकिन बड़ी प्रतिमा के रूप में वायुमार्ग से जाना संभवत: पहली बार होगा। अगले सप्ताह यहां से एक ऎसी ही पांच टन वजनी हनुमान प्रतिमा विमान के जरिए अमरीका के हवाई स्थित सान मार्गा आरैवान के हिन्दू मंदिर में पहुंचाई जाएगी।
भारत व श्रीलंका के बाहर विश्व का यह पहला मंदिर है, जो ग्रेनाइट से बना है। काले ग्रेनाइट की 50 टन वजनी एकलशिला से तराशकर 20 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा बनकर तैयार है। उच्च किस्म के ग्रेनाइट से मूर्ति तराशने में लगभग दो वर्ष का समय और 2,500 श्रम दिवस लगे हैं। प्रतिमा के बाएं हाथ पर मंदिर का तांबे का प्रतिरूप है। कर्नाटक चित्रकला परिषद के पूर्व छात्र संस्थान अर्था एण्टरप्राइजेज ने यह प्रतिमा बनाई है। इसे बनाने में आधुनिक तकनीक, शिल्प शास्त्र व हनुमान की शक्ति के पौराणिक मान्यताओं का ख्याल रखा गया है।
जय हनुमान
05 टन वजनी प्रतिमा
50 टन वजनी एकलशिला से तराशकर बनी
20 फीट ऊंची
02 वर्ष का समय लगा तराशने में
2,500 श्रम दिवस में बनी