05 November, 2014

खुद को दुर्घटना से बचाइए दूसरो की रक्षा स्वयं हो जाएगी...... नजर निल्को की

जीवन में कई बार दुर्घटनाए होती है। जिसमें कभी शरीर तो कभी दिल टूट जाता है। आष्चर्य की बात यह है कि आप भले ही कितने सर्तक हो, जागरूक हो..... दुर्घटना घट ही जाती है। मैं ठीक तरीके से वाहन चला रहा हूॅ किन्तु पीछे वाले की लापरवाही से दुर्घटना हुई। खुद भी घायल हुआ और दूसरो को भी किया। मतलब साफ है। केवल सावधानी ही नही रखनी है अपने आप को दुर्घटना से भी बचाना है। टे्र्ेन में सभी लोग सो रहे है। कुछ धार्मिक प्रवृति के लोग ईष्वर का नाम भी ले रहे है किन्तु डाइवर ने सिग्नल नही देखा और हो गई अनहोनी.......सैकडो लोगों की गई जान, कई घायल हुए।
जरा सोचिए कि क्या वाकई इसमें यात्रियोें की गलती थी। गलती किसी और की भरे कोई और..... क्या यही है निति........?
भाग-दौड की इस दुनिया में क्या आॅख बंद करके भागना जरूरी है। निल्को की नजर जब इस पर पडती है तो हर तरफ प्रष्नवाचक चिन्ह दिखाई देता है। इसे सामाजिक रूप से सोचू या आध्यामिक रूप से संतोषजनक जवाब की अब तक प्रतिक्षा है | 
-
एम.के. पाण्डेय 'निल्को’