18 November, 2014

डायरी के पीले पन्ने (i).......tripurendra ojha 'nishaan'

त्रिपुरेन्द्र ओझा 'निशान'


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आज २३ जून की रात को ८.५० हुए हैं ,आज साल का सबसे चमकीला चाँद निकला है ...

खिड़की से देखता हूँ तो धुंधला नजर आता है ...मेरा कवि मन उद्वेलित हो उठा , मै बैठ गया लिखने..

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ढँक गया इस धुंधलके में मेरा चाँद भी

खूबसूरती का गुमां इसे आज था जो

वक्त इतना बेमुरव्वत होगा आज

न था इसका अंदेशा आज मेरे चाँद को

देखो कैसे ढँक रहा बेगैरत बादल की बाहों में

ये जान कर भी कि एक झोंका

ले जायगा दूर उसके बेवफा आशिक को

छोड़ जाएगा वो मेरे चाँद को आधी शब में

वो रौशन है किसके सहारे ऐ निशान,

रात भी बेखबर है इस बात से और मेरा चाँद भी ...........................

त्रिपुरेन्द्र ओझा 'निशान'
  
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