10 जनवरी, 2011

भारतीय गणतंत्र दिवस

योगेश पाण्डेय
 वर्ष 26 जनवरी एक ऐसा दिन है जब प्रत्येक भारतीय के मन में देश भक्ति की लहर और मातृभूमि के प्रति अपार स्नेह भर उठता है। ऐसी अनेक महत्वपूर्ण स्मृतियां हैं जो इस दिन के साथ जुड़ी हुई है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 को 21 तोपों की सलामी के बाद भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को फहराकर भारतीय गणतंत्र के ऐतिहासिक जन् की घोषणा की थी। अंग्रेजों के शासनकाल से छुटकारा पाने के आठ सौ चौरान्यवें (894) दिन बाद हमारा देश स्वतंत्र राज् बना। तब से आज तक हर वर्ष राष्ट्रभर में बड़े गर्व और हर्षोल्लास के साथ गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। यही वह दिन था जब 1965 में हिन्दी को भारत की राजभाषा घोषित किया गया।। यही वह दिन है जब जनवरी 1930 में लाहौर ने पंडित जवाहर लाल नेहरु ने तिरंगे को फहराया था और स्वतंत्र भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की घोषणा की गई थी।
 211 विद्वानों द्वारा 2 महिने और 11 दिन में तैयार भारत के सँविधान को लागू किए जाने से पहले भी 26 जनवरी का बहुत महत्व था. 26 जनवरी एक विशेष दिन के रूप में चिह्नित किया गया था. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1930 के लाहौर अधिवेशन में पहली बार तिरंगे झंडे को फहराया गया था परंतु साथ साथ ही एक और महत्वपूर्ण फैसला इस अधिवेशन के दौरान लिया गया. इस दिन सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया था कि प्रतिवर्ष 26 जनवरी का दिनपूर्ण स्वराज दिवसके रूप में मनाया जाएगा. इस दिन सभी स्वतंत्रता सैनानी पूर्ण स्वराज का प्रचार करेंगे. इस तरह 26 जनवरी अघोषित रूप से भारत का स्वतंत्रता दिवस बन गया था.

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अगस्त 1947 में अंग्रेजों ने भारत की सत्ता की बागडोर जवाहरलाल नेहरू के हाथों में दे दी, लेकिन भारत का ब्रिटेन के साथ नाता या अंग्रेजों का अधिपत्य समाप्त नहीं हुआ. भारत अभी भी एक ब्रिटिश कॉलोनी की तरह था, जहाँ कि मुद्रा पर ज्योर्ज 6 की तस्वीरें थी. आज़ादी मिलने के बाद तत्कालीन सरकार ने देश के सँविधान को फिर से परिभाषित करने की जरूरत महसूस की और सविँधान सभा का गठन किया जिसकी अध्यक्षता डॉ. भीमराव अम्बेडकर को मिली.

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नवम्बर 1949 को देश के सँविधान को मंजूरी मिली. 24 जनवरी 1950 को सभी सांसदों और विधायकों ने इस पर हस्ताक्षर किए. और इसके दो दिन बाद यानी 26 जनवरी 1950 को सँविधान लागू कर दिया गया. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने. इस तरह से 26 जनवरी एक बार फिर सुर्खियों में गया. यह एक सयोंग ही था कि कभी भारत का पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाने वाला दिन अब भारत का गणतंत्र दिवस बन गया था
गणतंत्र दिवस पर पूरे देश भर में छुट्टी मनाई जाती है। गणतंत्र दिवस पर भारत के प्रधान मंत्री दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा लहराते हैं। उसके बाद गणतंत्र दिवस की परेड होती है, जिसमें अनेक झाँकियाँ भी दिखाई जाती हैं। भारत का एक एक प्रदेश एक झाँकी प्रस्तुत करता है। इस परेड में भारत की सांस्कृतिक विभिन्नता की झलक दिखती है। इसके बाद भारतीय सेना, अपनी फ़ायर पावर का प्रदर्शण करती है। इसके बाद सेएन अपने उन वीर जवानों को महावीर चक्र से पुरुस्क्रित करती है जिन्होंने अपने प्राणों की परवाह किये बिना देश की रक्षा में अपनी जान की आहूति दे दी। इस दिन पर भारतीय सरकार उन बच्चों को आदर देती है जो अपनी जान पर खेल कर किसी और कइ जान को बचाया है। सभी स्कूलों में भी इस दिन पर भारतीय झंडा लहराया जाता है और राष्ट्र गान भी गाया जाता है। इस दिन पर सभी लोग अपने परिवार के साथ इस दिन का लुफ़्त उठाते हैं। यह दिन सभी भरतीयों के लिये बहुत महत्त्व्पूर्ण है।
किसी भी देश के संविधान का ना होना उस देश की रीढ़ की हड़्ड़ी ना होने के समान है,.यानी कि हमें असली आज़ादी 26 जनवरी को मिली जब हमारे देश के नेताओं ने वर्षों से भारतीयों के शोषण युक्त कलम से लिखी इबारत को तोड़कर अपना संविधान लागू किया। लेकिन अंधानुकरण के इस दौर में गणतंत्र सिर्फधनऔरगनका तंत्र बन कर रह गया है.. गणतंत्र का मतलब हैजनता का तंत्र जनता के लिएअर्थात् इस संविधान में सर्वोपरि है जनतंत्र पर क्या मौज़ूदा हालातों के बाद कहा जा सकता है कि इस जनतंत्र(गणतंत्र) में जनता का सर्वोपरि स्थान आज भी वैसा ही मौज़ूद है जिसकी परिकल्पना हमारे राष्ट्र भक्त शहीदों और नेताओं ने की थी। तमाम प्रयासों के बाद आज भी देश की जनता के पास अगर कुछ है तो सिर्फ एक मूक दर्शक की सीमा,बुरा मत देखों बुरा मत सुनों ,बुरा मत कहो की तर्ज पर आज हमारे पास है बुरा देखने की बुरा सुनने की लेकिन उस बुराई का प्रतिवाद नही कहने(करने) की सीमा। जिस विदेशी भाषा,विदेशी विचार,और विदेशी तंत्र के लिए आवाजें उठाई गई उन आदर्शों के मायने बैमानी साबित हो रहे है।आज इस देश के गणतंत्र को खुली चुनौती दी रही है...पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवादियों को भेज कर हमारे देश की नींवों को खोखला करता जा रहा है, नक्सलवाद लगातार हमारी छाती पर अपने उपद्रवकी कीलें ठोकता जा रहा है...उसके बाद भी हमसे सिवाय ढ़िढ़ौरा पीटने के और कुछ नहीं हो पा रहा है...हमारे पास सिवाय दूसरों के समाने हाथ फैलाकर चिल्लाने के आलावा कोई रास्ता ही नहीं होता...आखिर क्यों हम ये भूल रहे हैं कि शांति दूत गांधी की इस धरती पर आज़ाद और भगतसिंह ने भी जन्म लिया है....आइए इस गणतंत्र दिवस की पावन बेला पर एक बार फिर से इस देश को बापू के सपनों का भारत बनाने की कोशिश शुरू करें। आइए जातिवाद को छोडकर एक बार फिर से कमजोर पड़ चुकी देश की नींव को मजबूत करें।कम से कम यह एक सच्ची श्रृद्धांजलि तो होगी उन अमर शहीदों की....तुम हो हिन्दू तो मुझे मुसलमां जान लो
तुम हो गीता तो मुझे कुरान मान लो
कब तक रहेगें अलग अलग और सहेगें ज़ुदा ज़ुदा
मैं तुम्हें पूंजू ,तुम मुझे अज़ान दो
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !

योगेश पाण्डेय