31 दिसंबर, 2011

निलेश
देवेश
समय, चाहता है परिवर्तन
इसलिए बदल देता है
हर साल को
और आ जाता है
साल के बाद
दूसरा नया साल।

आदमी भी बदलता है
जो तेजी से बदलता-
वह सब से अच्छा है
आदमी का नही बदलना
चेतन से जड़ होना है।

नही बदलने वाला
टूट जाता है प्रकृति से
और वे जीवित
भागते हैं कब्रगाह की ओर
बन जाते हैं, इतिहास के पन्ने
या पड़े रहते हैं मुर्दाघर में

मनुश्य भी प्रकृति का हिस्सा है
उसे बहना होगा हवा के साथ
गिराने होंगे पुराने पत्ते
खिलाने होंगे फूल तन-मन में
महकना होगा दूसरों के लिए
जीना ही होगा समश्टि के लिए
प्रस्तुत कर्ता--
देवेश और निलेश
नया साल की हार्दिक शुभकामनाये !

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