10 मार्च, 2012

तस्वीर कुछ कहती है


1 टिप्पणी:

  1. नेताओं का दुख कहीं यह नहीं था कि जनता लुट रही है. उनका तो दुख था कि वे उसे नहीं लूट पा रहे. और कोशिश यह कि अगले पांच साल इस लूट में वे शामिल हो सकें.

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