01 अप्रैल, 2012

 
जिसको न जिन गौरव तथा निज देश का अभिमान है, वह नर नहीं, पशु निरा है और मृतक समान है।' कितनी सच बात है यह। अगर हमारे दिल में हमारे देश के लिए, हमारी राष्ट्रभाषा के लिए, गौरव नहीं है, तो हमारा गौरवहीन जीवन है - हम मृतक समान हैं। 
जय हिंद !

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