01 मार्च, 2014

ठण्डा का मतलब सिर्फ कोका कोला नहीं होता

ठण्डा का मतलब सिर्फ कोका कोला नहीं होता
(बचपन की एक कहानी, निल्को की कलम से ...)


बात बहुत पुरानी नहीं होती,
कुछ बात छुपानी नहीं होती
हमारे बचपन की बात है
भाई गजेन्द्र जी के साथ है
एक अनोखी बात है –
ठण्डा पीने का आग्रह किया था साथ में
गजेन्द्र जी ने हामी भरी थी बीच बाज़ार में
जैसे ही निल्को ने ठण्डा का पाउच निकला
गजेन्द्र भाई जोर से भागा
और बड़े ज़ोर से चिल्लाया
अरे क्या यही ठण्डा होता है ?
जिससे आदमी भी ठण्डा पड़ सकता है
तो मधुलेश ने हंस कर कहा –
माना यह कविता पढ़ना जुर्म है
पर इससे किसी का मुंह कला नहीं होता
ठण्डा तो कुछ और भी होता है
इसका मतलब सिर्फ कोका कोला नहीं होता .....  

मधुलेश पाण्डेय निल्को