22 अप्रैल, 2016

माँ

माँ जब मैं कहता था 

या जब कुछ रटता था
सबसे पहले याद भी हुई तुम
सबसे जल्दी भूल भी गई तुम 
इसमें तेरे संस्कार की नहीं कमी
सोचने पर होते आँखे भी नमी 
माँ आज तेरे बिना कुछ भी नहीं
जो कहता था तूँ ही सब सही 
एक बार मुझे लगे तो लगा ले
या मुझे अपने पास ही बुला ले 
सादर वंदे
एम के पाण्डेय निल्को

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