09 दिसंबर, 2016

मुक्तक - जो भी तेरे पास आता है ।

जो भी तेरे पास आता है
वो तेरा ही हो जाता है
तेरी उलझी सुलझी ये जुल्फ़े
मद मस्त होकर लहराता है
-
एम के पाण्डेय निल्को

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