10 दिसंबर, 2016

मुक्तक : आँख






आंखो मे सुरमा लगाती क्यू है

आईना देख इतराती क्यू है

तुझ पर जाऊ मैं वारि वारि

पर मुझे तू बार बार आजमाती क्यू है



एम के पाण्डेय निल्को

 
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