22 दिसंबर, 2018

हनुमान जी की जाति क्या है ?

हनुमान ब्राह्मण जाति से हैं - रामायण में कई स्थान पर उनके प्रगाढ़ पाण्डित्य पर प्रकाश डाला गया है । जब वे अशोक वाटिका पहुंचते हैं तो उनका वक्तव्य है - यदि वाचं प्रदास्यामि द्विजातिरिव संस्कृताम् । रावण मन्यमाना मां सीता भीता भविष्यति ॥ अर्थात् यदि मैं संस्कृत भाषा का प्रयोग करता हूं तो सीता मां मुझे रावण समझकर भयभीत हो सकती हैं । ( संस्कृत प्रायः उच्च वर्गों की खास तौर पर ब्राह्मणों की भाषा थी)


हनुमान क्षत्रिय जाति से हैं - क्षत्रिय कौन होता है जो शौर्य प्रदर्शन करे । आपद्काल में शत्रुओं से रक्षा करे । हनुमान जब राक्षसों के विरूद्ध लड़ रहे हैं तो अपने क्षत्रियत्व गुण का ही प्रतिनिधित्व कर रहे हैं । हनुमान चालीसा में उक्त है -महावीर विक्रम बजरंगी । आगे वहीं पर कथित है कि उनके हाथ में वज्र और ध्वजा विद्यमान है और वे जनेउ भी धारण किए हैं ( हाथ वज्र और ध्वजा विराजे, कांधे मूंज जनेउ साजै)


हनुमान वैश्य जाति से हैं - अर्थ की दृष्टि से इस शब्द की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है जिसका मूल अर्थ "बसना" होता है। कर्म सिद्धांत वर्गीकरण मे पोषण के कार्यों से जुड़े गतिविधियों को वैश्य जाति के लोग अंजाम देते हैं । इस लिहाज से हनुमान सबसे बड़े वैश्य हैं क्योंकि वे स्वयं तो बसे ही लक्ष्मण को भी बसा दिया ।( संजीवनी लाकर उन्होंने लक्ष्मण को पुनर्जीवित किया था।)


हनुमान शूद्र जाति से हैं - गीता के १८वें अध्याय में कहा गया है कि परिचर्यात्मकं कर्म शूद्रस्यपि स्वभावजम् अर्थात् सेवा व सुश्रुषा करना शूद्र का कर्तव्य है । हनुमान से बड़ा भक्त खोज पाना नामुमकिन है । वे अनवरत अपने अराध्य प्रभु राम की सेवा में निरत रहते थे ।


गौरतलब है कि वर्ण का वर्गीकरण कर्म का वर्गीकरण है, न कि मनुष्य का वर्गीकरण। प्रत्येक मनुष्य कहीं न कहीं ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र स्वयं है क्योंकि इन चारों के गुण उसमें समबेत हैं । पहले समय मनुष्य जाति का एक ही वर्ण था, चार वर्ण अथवा भिन्न-भिन्न जातियों की स्थापना बाद में हुई है

एक वर्ण मिदं पूर्वं विश्वमासीद् युधिष्ठिर।

कर्म क्रिया विभेदेन चातुर्वर्ण्यम् प्रतिष्ठितम्॥

न विशेषोऽस्ति वर्णानाम् सर्व ब्राह्ममिदं जगत्। ( महाभारत )

आज के परिप्रेक्ष्य में हमें यह जरूर ध्यान रखना चाहिए कि वार्ता का प्रस्थान बिन्दु क्या है? क्या हनुमान को हम वर्ग विशेष के नाते पूजते हैं या उनके कर्म व गुणों के आधार पर । यदि वे नीच कुल के भी होते तो क्या हम उनके गुणों के आधार पर उन्हें समादृत नहीं करते ?

एम के पाण्डेय
रिसर्च स्कॉलर

30 नवंबर, 2018

हनुमान जी दलित और वंचित हैं

हनुमान जी को दलित कहने पर देश में सियासत शुरू हो गयी है। यूपी के सीएम योगी के बयान को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है। योगी के हनुमान जी को दलित कहने पर लोगों ने अपनी -अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है। हालांकि, सीएम योगी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हो रही है. ट्विटर, फेसबुक पर कई तरह के मेम्स बनाए जा रहे हैं. बता दें कि इससे पहले शहरों के नामों को लेकर भी योगी आदित्यनाथ विवादों में रहे हैं. सोशल मीडिया में इस बयान के हवाले से लोगों ने भाजपा और आदित्यनाथ पर जबर्दस्ती की जातिवादी राजनीति करने का आरोप लगाया है. फेसबुक पर पोस्ट एक है, ‘जिन्हें कृष्ण में यादव और हनुमान में दलित नजर आते हैं, वो हमें हिंदूवादी नहीं, जातिवादी नजर आते हैं.’ वैसे भी भारतीय चुनाव ऐतिहासिक और मिथकीय किरदारों जैसे मुगल, टीपू सुल्तान, नेहरू, गांधी, भगवान राम, हनुमान और विकास आदि के बारे में जानने का बहुत ही अच्छा मौका होते हैं.

11 अक्तूबर, 2018

गंगा मइया की रक्षा के लिए अनशन पर बैठा एक संत अमर हो गया |

लंबे समय से मां गंगा की स्वच्छता और रक्षा की मांग कर रहे पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल की गुरुवार को मौत हो गई। उन्‍हें स्वामी सानंद के नाम से जाना जाता था। स्वामी सानंद पिछले 112 दिनों से अनशन पर थे और उन्होंने 9 अक्टूबर को जल भी त्याग दिया था। उन्‍होंने ऋषिकेश में दोपहर एक बजे अंतिम सांस ली। वह 87 साल के थे। सानंद गंगा नदी की स्वच्छता को लेकर प्रयासरत थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिख चुके थे। 

जीडी अग्रवाल आईआईटी कानपुर में सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख थे। उन्होंने राष्ट्रीय गंगा बेसिन प्राधिकरण का काम किया। इसके अलावा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पहले सचिव भी रहे।

गंगा समेत अन्य नदियों की सफाई को लेकर जीडी अग्रवाल ने पहली बार 2008 में हड़ताल की थी। मांगें पूरी कराने के लिए उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को अपना जीवन समाप्त करने की धमकी भी दी। वे तब तक डटे रहे, जब तक सरकार नदी के प्रवाह पर जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण को रद्द करने पर सहमत न हुई।

जुलाई 2010 में तत्कालीन पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री जयराम रमेश ने व्यक्तिगत रूप से उनके साथ बातचीत में सरकार के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। साथ ही, गंगा की महत्वपूर्ण सहायक नदी भागीरथी में बांध नहीं बनाने पर सहमति भी जताई।

2014 में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की स्वच्छता के लिए प्रतिबद्धता दिखाई थी। इसके बाद जीडी अग्रवाल ने आमरण अनशन खत्म कर दिया था। हालांकि, सरकार बनने के बाद से अब तक ‘नमामि गंगे’ परियोजना का सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। ऐसे में अग्रवाल ने 22 जून, 2018 को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृसदन आश्रम में दोबारा अनशन शुरू कर दिया।

अग्रवाल 2012 में पहली बार आमरण अनशन पर बैठे थे। इस दौरान राष्ट्रीय गंगा बेसिन प्राधिकरण को निराधार कहते हुए उन्होंने इसकी सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया। साथ ही, अन्य सदस्यों को भी यही करने के लिए प्रेरित किया। पर्यावरण के क्षेत्र में उनकी प्रतिष्ठा को देखते हुए उनके हर उपवास को गंभीरता से लिया गया।

10 जुलाई, 2018 को पुलिस ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे जीडी अग्रवाल को जबरन उठा लिया और एक अज्ञात स्थान पर ले गए। अग्रवाल ने इसके खिलाफ उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 12 जुलाई, 2018 को उत्तराखंड के मुख्य सचिव को आदेश दिया कि जीडी अग्रवाल से अगले 12 घंटे में बैठक करके उचित हल निकाला जाए। इसके बावजूद कुछ भी सार्थक परिणाम नहीं निकला।

सरकार ने वयोवृद्ध पर्यावरणविद को ऋषिकेष स्थित एम्स में हिरासत में ले लिया। यहां चिकित्सकों के जबरदस्ती करने पर भी उन्होंने भोजन नहीं किया। 9 अक्टूबर से जल भी त्याग दिया था। इस दौरान सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने उनसे अनशन खत्म करने का आग्रह किया, जिसे स्वामी सानंद ने अस्वीकार कर दिया था।

03 अक्तूबर, 2018

स्वच्छता अभियान पर दो टूक - ब्रजेश पाण्डेय

सबसे पहले देश के दो महान सपूत बापू और शास्त्री जी को नमन। बापू ने स्वछता के प्रति हमें जगाया तो शास्त्री जी ने जय जवान-जय किसान का नारा दिया। स्वच्छ्ता अभियान का शुभारम्भ आज ही के दिन आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने किया। उन्हें भी मेरा कोटि-कोटि प्रणाम। लेकिन मन में एक सवाल चुभता है कि हम कितना स्वच्छ हैं और देश का जवान-किसान कितना खुशहाल। स्वच्छता अभियान को लेकर झाड़ू लगाने का दौर पिछले चार साल से चल रहा है। तकरीबन 50 फीसद हम सफल भी हुए हैं। यह आंकड़ा और भी बढ़ता जब हम सिर्फ मीडिया में स्वच्छता का ढोंग न रचते। जैसा की अपने कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की आदत है। पहले अपने घर की गंदगी साफ़ करनी होगी।तन-मन दोनों की सफाई जरूरी है। लेकिन यहां तो सफाई का बजट भी साफ़ करने में बंदे पीछे नहीं हैं। बजट पर नहीं जाऊँगा क्योंक़ि सफाई मद पर जितना प्रदेश को मिलना था, एक तिहाई मिला। जो मिला उसमें से भी तथाकथित लोगों ने कमीशन बनना शुरू कर दिया। मेरा अपना विचार है कि जब तक करप्शन की सफाई नहीं होगी। संसद की गंदगी दूर नहीं की जायेगी, संपूर्ण स्वच्छ्ता पर बात बेमानी होगी।

अब बात जवानों और किसानों की। जवान सीमा पर कितना सुरक्षित हैं, आप जानते हैं। आपको यह भी पता होगा कि बापू, नेहरू और शास्त्री जी जैसे लोग कभी सुरक्षा में जवानों की फौज नहीं लेकर चलते थे। उनकी दृढ इच्छा शक्ति ही, उनके लिए ढाल का काम करता था। जब अच्छे-बुरे कर्मो का हिसाब-किताब करके इस दुनिया से सबको चले जाना है तो फिर नेताओं और मंत्रियों की सुरक्षा पर करोड़ो रुपये जनता का क्यों खर्च हो रहा। इस रकम से तो देश की सीमा को और भी मजबूत किया जा सकता है। किसान जिंदगी भर मेहनत करते-करते सिर्फ दो जून की रोटी, तन ढकने के लिए कपड़ा और रहने के लिए दो कमरे बना लेता है, लेकिन वह तो कभी लक्जरी गाडी में बैठने का भी सपना नहीं देख पाता। तो फिर क्या शास्त्री जी का नारा अधूरा नहीं लगता। बात कड़वी जरूर लगेगी मित्रों, लेकिन सही मायने में सबका साथ, सबका विकास का दंभ भरने वाली अपनी सरकार सिर्फ अपने नेताओं और पूंजीपतियों के लिए ही कार्य कर रही है।
यदि मेरी बातें आपको बुरा लगे तो क्षमा कीजियेगा।
सादर
ब्रजेश पाण्डेय
दैनिक जागरण गोरखपुर

24 सितंबर, 2018

सरकार, छोड़िये ब्लैकमेल की राजनीति, जनता तो हिसाब मांगेगी।


लूला-लँगड़ा हो चुके विपक्ष से आप यह उम्मीद लगाकर बैठेंगे, कि सरकारी लूट का ए विरोध करेंगे तो इस मुग़ालते में मत रहिए। सरकार का विरोध करने के लिए किसी के पास कूबत नहीं है। थोड़ी कूबत राहुल ने दिखा दी तो आपने उसे मानसिक बीमार बता डाला। मुलायम सिंह यादव, मायावती बोलेंगे नहीं, क्योंकि आय से अधिक सम्पप्ति का मामला सरकार उछाल कर इन्हें अंदर कर सकती है। जब प्रेस कांफ्रेंस में नथुने बहुत जोर-जोर से फड़क रहे हों तो इसका मतलब यही होता है कि दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा है। रविशंकर प्रसाद नथुने फड़काते हुए प्रेस काँफ्रेंस में आये। ठीक उसी तरह जैसे अमित शाह जी के लाडले जय शाह के बचाव में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल आये थे।
वैसे दोनों मामलों में एक अंतर है। पीयूष गोयल देश के पहले ऐसे केंद्रीय मंत्री बने थे जो किसी प्राइवेट सिटीजन पर लगे चार-बीसी के इल्जामों का बचाव करने आये हों। प्रसाद जी मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री हैं, इस नाते उन्हे प्रधानमंत्री की ओर से बोलने का पूरा हक है। आप पूछ सकते हैं कि मामला रक्षा मंत्रालय का था, तो फिर निर्मला सीतारमन क्यों नही, नथुने तो उनके भी बराबर फड़कते हैं।
आपका पता होना चाहिए कि यह सर्जिकल स्ट्राइक वाली सरकार है। कब कहां से स्ट्राइक हो जाएगा पता नहीं। कृषि मामलों में गृह मंत्री, गृह संबंधित मामलों पर रक्षा मंत्री और रक्षा से जुड़े मामलों पर आईटी मंत्री। जैसे टोटल हॉकी के नये फॉरमेंट में कभी डिफेंडर आगे बढ़ जाता है और कभी फॉरवर्ड गोल बचाने के लिए पीछे चला आता है। पात्रा जी तो मैनेजर हैं ही।
रविशंकर प्रसाद बहुत तगड़े डिफेंडर हैं। वकालत में कोई सानी नहीं है। आंखे निकालकर चंगू-मंगुओं को डराना भी जानते हैं।
  हद देखिये,  रवि बाबू ने राफेल सौदे पर लगे अति गंभीर इल्जामों के जवाब में पहले पूरे नेहरू-गांधी खानदान की कुंडली बांची। मैं इंतज़ार कर रहा था कि वे कहेंगे कि हम लोगों ने मोहन जी के सामने शपथ ली है कि अगली सात पीढ़ियों तक इस घटिया खानदान में बेटे या बेटी का ब्याह नहीं करेंगे। लेकिन ऐसा उन्होंने नहीं कहा। यह मास्टर स्ट्रोक आगे लिए बचा लिया।
देश इंतज़ार कर रहा था कि रवि बाबू राफेल विमान की कीमत निकालकर कांग्रेसियों के मुंह पर दे मारेंगे। पर कुछ न हुआ न होगा क्योंकि चोर चोर मौसेरे भाई

14 सितंबर, 2018

देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ? - अनुज शुक्ला

देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ?
खाक में मिल कर भी कहता है , अभी बिगड़ा क्या है ?
देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ।।
मैं तो तेरे मस्त निगाहों की मजे लेता हूँ
वरना साकी तेरे मयखाने में रखा क्या है ?
देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ?
जिनकी जनाज़ों को हसीनों ने दिए हो कांधे
वो तो बारात है बारात, जनाजा क्या है?
देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ?
अपनी तस्वीर लड़कपन की जवानी में न देख
चाँद के सामने, वो चाँद का टुकड़ा क्या है?
देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ?
ये इंसान, तेरे घरवाले, तेरे दोस्त, तेरे अहबाद
तुझको गंगा किनारे जला देगे, समझता क्या है?
देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ?
अपने होठों से मेरे हाथों को छूने दो न यार
एक दो घूंट से बोतल का बिगड़ता क्या है ?
खाक में मिल कर भी कहता है , अभी बिगड़ा क्या है ?
देख लैला तेरे मजनू का कलेजा क्या है ?










अनुज शुक्ला

08 सितंबर, 2018

क्या भारत धीरे-धीरे घुसपैठ से इस्लामी राष्ट्र में बदल जायेगा?


कुछ अटपटा लगा होगा पढ़ कर, पहली बार ऐसा कोई पोस्ट कर रहा हूँ । क्या है कि एक सर्वे किया , लोगो से यही सवाल पूछा तो उन्होंने कुछ इस अंदाज में जवाब दिया - 

राजस्थान विश्वविद्यालय, पी एच डी हिंदी साहित्य की सुमन विष्ट का कहना है कि - वर्तमान मे ये सबसे ज्वलंत प्रश्न है। मै TV मे समाचार देख रही थी कि किस प्रकार से बंग्लादेश देश निर्माण के पश्चात असम मे घुसपैठ द्वारा मुस्लिम आ्बादी मे 30प्रतिशत इजाफा हुआ है जो कि चिन्तन के साथ चिन्तनीय है | ये तो एक राज्य की स्थिति है.आगे अन्य राज्यों के आकड़े आना तो बाकी है।
मुस्लिम आबादी का बढ़ने मे घुसपैठ का बहुत बड़ा योगदान रहा है ये भी कटु सत्य है। अब आगे इसका क्या स्वरूप होगा? ये पूरी तरह से प्रशासनिक नितियों व सरकारी कार्यवाही पर ही निर्भर करेगा।

भूतपूर्व सैनिक पुष्पेंद्र जी का कहना है कि - ऐसा लगातार हुआ है | इस्लाम के अनुयायी आज भी देश से प्यार नही करते | वे इस देश में केवल अपना प्रभुत्व चाहते है | वे हिन्दुओ को देखना नही चाहते | पाकिस्तान इसकी सबसे बड़ी मिसाल है |

वही नवीन गौड़ कहते है कि - इसका सीधा साधा जवाब हैं “नही”

घुसपैठ से हो रहा था लेकिन अब मोदी जी की सरकार हैं और सरकार,सरकार में फर्क हैं. क्योकि जिस तरह से हर रोज कांग्रेस के काले राज को लेकर खुलासे हो रहे हैं उससे हर हिन्दू को जागना ही होगा और अपने धर्म के लिए सोचना ही होगा. हिन्दू धर्म इतना सुदृढ़ हैं की इसे ख़त्म करना इतना आसन नही हैं किसी भी गलत धारणा वाले धर्म के लिए.
एक और बात की हम धन्य हैं की हमें मोदी जी जैसे प्रधानमंत्री मिले जिन्होंने हमेशा देश की सुरक्षा को महत्व दिया. और उन लोगो में अब बौखलाहट हैं जो कांग्रेस सरकार के काले शासन के चलते अपने मंसूबो में कामयाब होते रहे लेकिन अब ऐसा नही हो रहा हैं.
आजकल उत्तरप्रदेश में जिस तरह से पिछली सरकारों में सरकारी विद्यालयों का किया जाने वाला इस्लामीकरण पकड़ में आ रहा हैं उसे देखकर यही लगता हैं की यदि 2014 में मोदी जी की सरकार नही बनी होती तो जो ये प्रश्न पूछा गया हैं वो हकीकत बन रहा होता. क्योकि ऐसा नही की ये कारनामे पिछली गैरबीजेपी सरकारों को पता नही थी, पता होने के बावजूद भी ऐसा होने दिया जा रहा था केवल और केवल वोट और राजसुख के लिए, लेकिन जनता जगी और मोदी और योगी को सता सौपी जिसके परिणाम सामने आ रहे हैं , धर्म परिवर्तन के लिए दी जा रहे अवैध फंडिंग बंद कर दी गई हैं. इस्लामिक राष्ट्र तो क्या कोई भी शैतानी सोच हिन्दू धर्म और हिंदुस्तान का बाल भी बांका नही कर सकती हैं. जय हिन्द

तरह तरह के लोग और उनकी अपनी अपनी राय । पर सवाल का सही जवाब तो सही समय आपने पर ही पता चलेगा , इसी के साथ नए सवालों के साथ फिर हाज़िर होऊंगा तब तक के लिए नमस्कार । 

आपका एम के पाण्डेय निल्को

03 सितंबर, 2018

Asian Games 2018 - एशियन गेम्स 2018 का समापन

इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेमबांग में खेले गए 18वें एशियाई खेलों का रविवार को अंत हो गया। रंगारंग कार्यक्रम के साथ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति और एशियाई ओलंपिक काउंसिल के अध्यक्ष शेख अहमद अल फहाद अल सबाह ने इसकी आधिकारिक तौर पर समापन की घोषणा की। 19वें एशियाई खेलों की मेजबानी चीन का हैंगजू शहर करेगा।

भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल ने समापन समारोह में तिरंगा लेकर भारतीय दल का नेतृत्व किया। समारोह में इंडोनेशिया की आधुनिक संस्कृति की झलक के साथ.साथ बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान के गानों को सिद्धार्थ सलाठिया ने गाकर भारतीय एथलीटों के साथ साथ जकार्ता को भी मदहोश कर दिया। उनके साथ इंडोनेशिया की सिंगर डेनाडा ने भी खूबसूरत प्रदर्शन किया।

18 अगस्त से 2 सितंबर तक खेले गए इन खेलों में 45 देशों के 11,300 एथलीट्स ने भाग लिया। इस दौरान 40 खेलों की 465 स्पर्धाओं का आयोजन हुआ। मेजबान इंडोनेशिया सहित 45 देशों ने हिस्‍सा लिया। भारत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कुल 69 पदक जीते। इसमें 15 गोल्ड, 24 सिल्वर और 30 कांस्य पदक शामिल हैं। वह आठवें स्थान पर रहा।

यह एशियाई खेलों में भारत का अबतक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है, इसके पहले ने भारत साल 2010 में ग्वांगजू एशियाई खेलों में 65 पदक जीते थे। वहीं साल 1991 में भारत ने पहले एशियाई खेलों में 15 स्वर्ण पदक हासिल किए थे। भारत ने इस स्वर्णिम इतिहास की बराबरी कर ली।

इन खेलों में चीन ने 132 स्वर्ण, 92 रजत और 65 कांस्य पदक सहित कुल 289 पदक हासिल किए। चीन के बाद दूसरे स्थान पर जापान रहा। जापान ने 75 गोल्ड, 56 सिल्वर और 74 कांस्य पदक सहित कुल 205 पदक जीते। दक्षिण कोरिया 177 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इसमें 49 स्वर्ण, 58 रजत और 70 कांस्य पदक जीते।

13 अगस्त, 2018

प्रकृति की विशेषता : एम के पाण्डेय निल्को

इस पूरे ब्रह्माण्ड में सिर्फ एक ही जगह ऐसी है जहाँ जीवन है और जहाँ चारो ओर हरियाली रहती है और इस हरियाली से यह धरती बहुत ही सुन्दर और आकर्षक लगती है. यह प्रकृति ही है जो हमें स्वस्थ जीवन जीने के लिए एक प्राकृतिक पर्यावरण देती है | यह प्रकृति हमें भगवान द्वारा दिया गया एक बहुमूल्य कीमती उपहार के समान है. हमें इस प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए और इसे नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए |
प्रकृति की सभी चीजों में कुछ ना कुछ अदभुत है

28 जुलाई, 2018

कुछ और हो गए तुम - सोनू जैन

शेर  से  शोर  हो   गये  हो  तुम,
कितने कमज़ोर हो गये हो तुम।

हमको  पहचानते  नहीं  साहब,
आज कुछ ओर हो गये हो तुम।

बात  करते  नहीं ख़ुदा  से भी,
क्या कोई चोर हो गये हो तुम।

तुमको मालूम  ही नहीं  शायद,
ख़ुद से भी बोर हो गये हो तुम।

"सोनू" तुमसे हमें ये कहना है,
मैं पतंग, डोर  हो गये हो तुम।

✍सोनू कुमार जैन

26 जुलाई, 2018

ग़ज़ल - सरिता कोहिनूर

देश के उपकार पर अभिसार होना चाहिए
आदमी को आदमी से प्यार होना चाहिए

कौन कहता है,यहाँ है देश भक्तों की कमी
देखने वाली ऩज़र में धार होना चाहिए

सरहदों पर सैनिकों की क्यों शहादत रोज हो
आधुनिक और तेज सब हथियार होना चाहिए

पाक की नापाक कोशिश, चीन का अभिमान भी
तोड़ कर सीमा हमें अब पार होना चाहिए

देश की रोटी हैं खाते और बजाते पाक की
दोगले घोषित यहाँ गद्दार होना चाहिए

आज भी जिसको यहाँ माँ भारती से प्रेम है
उन जियालों का यहाँ सत्कार होना चाहिए

बह रहा है रक्त में हम सबके भारत का नमक
इसलिए माँ भारती पे वार होना चाहिए

देखती है ख़्वाब सरिता देश की तरुणाइ का
विश्व गुरु का अर्थ अब साकार होना चाहिए

सरिता कोहिनूर 💎

27 जून, 2018

भारत महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक देश


एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे रिपोर्ट में भारत को महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक देश बताया गया है। थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन की सर्वे में महिलाओं के प्रति यौन हिंसा, मानव तस्करी और यौन व्यापार में ढकेले जाने के आधार पर भारत को महिलाओं के लिए खतरनाक बताया गया है । 

इस सर्वे के अनुसार महिलाओं के मुद्दे पर युद्धग्रस्त अफगानिस्तान और सीरिया क्रमश: दूसरे और तीसरे सोमालिया चौथे और सउदी अरब पांचवें स्थान पर हैं । सात साल पहले इसी सर्वे में भारत को महिलाओं के लिए दुनिया का चौथा सबसे खतरनाक देश बताया गया था।

दुनिया भर से केवल 548 जानकारों से 26 मार्च से 4 मई के बीच ऑनलाइन फोन और व्यक्तिगत तौर पर रायशुमारी की गई और बना दी गई एक ऐसा रिपोर्ट जिस पर विश्वास हो भी तो क्यो और कैसे ? 

जो फिरंगी आजतक एक आदर्श परिवार न बसा सके वो खुद के बनाए मापदंड के अनुसार भारत का सर्वे कर रहे है ? इस मुद्दे पर महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि भारत के बाद रखे गए देशों में महिलाओं को बोलने का हक भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों से सर्वे किया गया उनकी संख्या बहुत कम है। उनकी राय के आधार पर दुनिया की राय नहीं बनाई जा सकती। 


भारत से ज्यादा सुरक्षा जिन देशो में है इस सर्वे के मुताबिक , उनका नाम लिखुंगा तो हसते हसते पेट मे दर्द हो जाएगा । आज भी भारत की महिलाएं और देशो की महिलाओं की तुलना में बहुत सभ्य संस्कारी और सुरक्षित है हाँ कुछ अपवाद हो सकते है इससे कोई इंकार भी नहीं कर सकता लेकिन इस तरह की रिपोर्ट तो बस पूर्व प्रायोजित ही है । महिलाएं ही नहीं किसी भी श्रेणी के लोगो के लिए भारत ही सबसे सुरक्षित देश है , इसके लिए कोई भी इतिहास का सहारा ले सकता है ।

एम के पाण्डेय निल्को


31 मई, 2018

......विधवा विलाप करते है

ये जो ऑफिस के काम है न
बहुत बवाल करते है 
कोई एक स्टाफ चुप हो तो
दूसरा सवाल करते है 
और जब दे देता हूँ जवाब इनको 
तो पीठ पीछे बैठ कर विधवा विलाप करते है
एम के पाण्डेय निल्को

24 अप्रैल, 2018

कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के दाग - सलमान खुर्शीद

सलमान खुर्शीद ने कह दिया कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के दाग लगे हैं। मैं कांग्रेस का नेता हूं। इस नाते मुसलमानों के ख़ून के यह धब्बे मेरे अपने दामन पर भी हैं - सलमान खुर्शीद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने ताला नगरी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के डॉ. बीआर आंबेडकर हॉल में आयोजित वार्षिकोत्सव में छात्रों से संवाद किया। इसी दौरान उनसे सीधे सवाल जवाब किए। इसी दौरान आमिर मिंटोई नाम के छात्र ने सलमान खुर्शीद से सवाल पूछा कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के जो धब्बे हैं, इन धब्बों को आप किन अल्फ़ाज़ों से धोना चाहेंगे?
खुर्शीद से एएमयू के एक पूर्व छात्र ने पूछा, "1948 में एएमयू एक्ट में पहला संशोधन हुआ था, उसके बाद 1950 में राष्ट्रपति का आदेश, जिससे मुस्लिमों से आरक्षण का छीना गया और फिर हाशिमपुरा, मलियाना और मुज्जफरपुर जैसे दंगों की लिस्ट है। इसके अलावा बाबरी मस्जिद की शहादत ये सब कांग्रेस के राज में हुआ। मुसलमानों की मौत के धब्बे कांग्रेस के दामन पर हैं इन्हें आप कैसे धोएंगे?" इस पर खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस के दामन पर मुस्लिमों के खून के धब्बे हैं। खुर्शीद यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि चूंकि मैं कांग्रेस का नेता हूं इसलिए मुस्लिमों के खून के दाग मेरे दामन में भी हैं, लेकिन ये आप पर ना लगें इसलिए आप इन घटनाओं से सीखें।

01 मार्च, 2018

होलिका दहन - जश्न का पर्व

कहते हैं होलिका दहन के दिन तीन चीजों का होना काफी शुभ माना जाता है. ये तीन चीजें हैं प्रदोण काल का होना, पुर्णिमा तिथि का होना और भद्रा ना लगा होना. इस साल ये तीनों संयोग बन रहे है. जिससे इस साल होलिका दहन बहुत शुभ मानी जा रही है . फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त में आज होलिका दहन और पूजन किया जाएगा। इसलिए इस शुभ मुहूर्त में पूजा करेंगे तो सौभाग्य मिलेगा।
आज शाम होलिका दहन किया जाएगा और कल रंगों के साथ इस पर्व का जश्न मनाया जाएगा.

19 फ़रवरी, 2018

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) - द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य श्री गुरूजी

स्वयंसेवक होने से बढ़कर गर्व और सम्मान की दूसरी बात हमारे लिए कोर्इ नहीं है। जब हम कहते हैं कि मैं एक साधारण स्वयंसेवक हूँ, तब इस दायित्व का बोध हमें अपने हदय में रखना चाहिए कि यह दायित्व बहुत बड़ा है। समाज की हमसे बड़ी-बड़ी अपेक्षाएँ रहें और उन अपेक्षाओं को पूर्ण करते हुए हम उनसे भी अधिक अच्छे प्रमाणित हों। हर स्वयंसेवक ऐसे गुणवत्ता का बने इसके लिए संघ की सरल कार्यपद्धती है। संघ का समाज में प्रभाव अगर बढ़ा है और बढेगा तो केवल ऐसे स्वयंसेवकों के व्यवहार से ही बढेगा इसलिए स्वयंसेवक का संघ में स्थान अनन्यसाधारण है

माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य श्री गुरूजी (मराठी: माधव सदाशिव गोळवलकर ; जन्म: १९ फ़रवरी १९०६ - मृत्यु: ५ जून १९७३) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक तथा महान विचारक थे। उन्हें जनसाधारण प्राय: 'गुरूजी' के ही नाम से अधिक जानते हैं।

उनका जन्म फाल्गुन मास की एकादशी संवत् 1963 तदनुसार 19 फ़रवरी 1906 को महाराष्ट्र के रामटेक में हुआ था। वे अपने माता-पिता की चौथी संतान थे। उनके पिता का नाम श्री सदाशिव राव उपाख्य 'भाऊ जी' तथा माता का श्रीमती लक्ष्मीबाई उपाख्य 'ताई' था। उनका बचपन में नाम माधव रखा गया पर परिवार में वे मधु के नाम से ही पुकारे जाते थे। पिता सदाशिव राव प्रारम्भ में डाक-तार विभाग में कार्यरत थे परन्तु बाद में सन् 1908 में उनकी नियुक्ति शिक्षा विभाग में अध्यापक पद पर हो गयी। मधु जब मात्र दो वर्ष के थे तभी से उनकी शिक्षा प्रारम्भ हो गयी थी। पिताश्री भाऊजी जो भी उन्हें पढ़ाते थे उसे वे सहज ही इसे कंठस्थ कर लेते थे। बालक मधु में कुशाग्र बुध्दि, ज्ञान की लालसा, असामान्य स्मरण शक्ति जैसे गुणों का समुच्चय बचपन से ही विकसित हो रहा था। सन् 1919 में उन्होंने 'हाई स्कूल की प्रवेश परीक्षा' में विशेष योग्यता दिखाकर छात्रवृत्ति प्राप्त की। सन् 1922 में 16 वर्ष की आयु में माधव ने मैट्रिक की परीक्षा चाँदा (अब चन्द्रपुर) के 'जुबली हाई स्कूल' से उत्तीर्ण की। तत्पश्चात् सन् 1924 में उन्होंने नागपुर के ईसाई मिशनरी द्वारा संचालित 'हिस्लाप कॉलेज' से विज्ञान विषय में इण्टरमीडिएट की परीक्षा विशेष योग्यता के साथ उत्तीर्ण की। अंग्रेजी विषय में उन्हें प्रथम पारितोषिक मिला। वे भरपूर हाकी तो खेलते ही थे कभी-कभी टेनिस भी खेल लिया करते थे। इसके अतिरिक्त व्यायाम का भी उन्हें शौक था। मलखम्ब के करतब, पकड़ एवं कूद आदि में वे काफी निपुण थे। विद्यार्थी जीवन में ही उन्होंने बाँसुरी एवं सितार वादन में भी अच्छी प्रवीणता हासिल कर ली थी। 

सबसे पहले ""डॉ॰ हेडगेवार"" के द्वारा काशी विश्वविद्यालय भेजे गए नागपुर के स्वयंसेवक भैयाजी दाणी के द्वारा श्री गुरूजी संघ के सम्पर्क में आये और उस शाखा के संघचालक भी बने। 1937 में वो नागपुर वापस आ गए। नागपुर में श्री गुरूजी के जीवन में एक दम नए मोड़ का आरम्भ हो गया। ""डॉ हेडगेवार"" के सानिध्य में उन्होंने एक अत्यंत प्रेरणा दायक राष्ट्र समर्पित व्यक्तित्व को देखा। किसी आप्त व्यक्ति के द्वारा इस विषय पर पूछने पर उन्होंने कहा- "मेरा रुझान राष्ट्र संगठन कार्य की और प्रारम्भ से है। यह कार्य संघ में रहकर अधिक परिणामकारिता से मैं कर सकूँगा ऐसा मेरा विश्वास है। इसलिए मैंने संघ कार्य में ही स्वयं को समर्पित कर दिया। मुझे लगता है स्वामी विवेकानंद के तत्वज्ञान और कार्यपद्धति से मेरा यह आचरण सर्वथा सुसंगत है।" 1938 के पश्चात संघ कार्य को ही उन्होंने अपना जीवन कार्य मान लिया। डॉ हेडगेवार के साथ निरंतर रहते हुवे अपना सारा ध्यान संघ कार्य पर ही केंद्रित किया।इससे डॉ हेडगेवार जी का ध्येय पूर्ण हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक ""डॉ हेडगेवार"" के प्रति सम्पूर्ण समर्पण भाव और प्रबल आत्म संयम होने की वजह से 1939 में माधव सदाशिव गोलवलकर को संघ का सरकार्यवाह नियुक्त किया गया। 1940 में ""हेडगेवार"" का ज्वर बढ़ता ही गया और अपना अंत समय जानकर उन्होंने उपस्थित कार्यकर्ताओं के सामने माधव को अपने पास बुलाया और कहा ""अब आप ही संघ का कार्य सम्भालें""। 21 जून 1940 को हेडगेवार अनंत में विलीन हो गए। 16 अगस्त 1946 को मुहम्मद अली जिन्नाह ने सीधी कार्यवाही का दिन घोषित कर के हिन्दू हत्या का तांडव मचा दिया। उन्ही दिनोँ में श्री गुरूजी देश भर के अपने प्रत्येक भाषण में देश विभाजन के खिलाफ डट कर खड़े होने के लिए जनता का आह्वान करते रहे किन्तु कांग्रेसी नेतागण अखण्ड भारत के लिए लड़ने की मनः स्थिति में नहीं थे। पण्डित नेहरू ने भी स्पष्ट शब्दों में विभाजन को स्वीकार कर लिया था और 3 जून 1947 को इसकी घोषणा कर दी गई। एकाएक देश की स्थिति बदल गई। इस कठिन समय में स्वयंसेवकों ने पाकिस्तान वाले भाग से हिंदुओं को सुरक्षित भारत भेजना शुरू किया। संघ का आदेश था की जब तक आखिरी हिन्दू सुरक्षित ना आ जाए तब तक डटे रहना है। भीषण दिनों में स्वयंसेवकों का अतुलनीय पराक्रम, रणकुशलता, त्याग और बलिदान की गाथा भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से लिखने लायक है। श्री गुरूजी भी इस कठिन घडी में पाकिस्तान के भाग में प्रवास करते रहे। b30 जनवरी 1948 को गांधी हत्या के मिथ्या आरोप में 4 फरवरी को संघ पर प्रतिबन्ध लगाया गया। श्री गुरूजी को गिरफ्तार किया गया।देश भर में स्वयंसेवको की गिरफ्तारियां हुई। जेल में रहते हुवे उन्होंने पत्र-पत्रिकाओं का विस्तृत व्यक्तव्य भेजा जिसमे सरकार को मुहतोड़ जवाब दिया गया था। आह्वान किया गया की संघ पर आरोप सिद्ध करो या प्रतिबन्ध हटाओ। देश भर में यह स्वर गूंज उठा था। 26 फरवरी 1948 को देश के प्रधानमन्त्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को गृह मंत्री वल्लभ भाई पटेल ने अपने पत्र में लिखा था ""गांधी हत्या के काण्ड में मैंने स्वयं अपना ध्यान लगाकर पूरी जानकारी प्राप्त की है। उस से जुड़े हुवे सभी अपराधी लोग पकड़ में आ गए हैं। उनमें एक भी व्यक्ति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नहीं है।"" 

9 दिसम्बर 1948 को सत्याग्रह नाम के इस आंदोलन की शुरुआत होते ही कुछ 4-5 हज़ार बच्चों का यह आंदोलन है ऐसा मानकर नेतागण ने इसका मजाक उड़ाया। लेकिन उसके उलट किसी भी कांग्रेसी आंदोलन में इतनी संख्या नहीं थी। 77090 स्वयंसेवकों ने विभिन्न जेलों को भर दिया। आख़िरकार संघ को लिखित संविधान बनाने का आदेश दे कर प्रतिबन्ध हटा लिया गया और अब गांधी हत्या का इसमें जिक्र तक नहीं हुआ। 

तब सरदार वल्लभभाई पटेल ने गुरूजी को भेजे हुवे अपने सन्देश में लिखा की ""संघ पर से पाबन्दी उठाने पर मुझे जितनी ख़ुशी हुई इसका प्रमाण तो उस समय जो लोग मेरे निकट थे वे ही बता सकते हैं... मैं आपको अपनी शुभकामनाएं भेजता हूँ।""

छत्रपति शिवाजी महाराज

छत्रपति शिवाजी महाराज एक महान योद्धा एवं रणनीतिकार होने के साथ -साथ धर्म व राष्ट्रीयता के जीवंत प्रतीक थे। शिवाजी महाराज ने अपने राज्य में सुशासन की कल्पना को साकार कर एक लोककल्याणकारी राज्य की स्थापना की। उनका अदम्य साहस, उनकी बहादुरी व उनके संदेश हमको सदैव प्रेरित करते रहेंगे।

24 जनवरी, 2018

Padmaavat Movie Review : इतनी विवादों के बाद आखिरकार पद्मावत रिलीज हो ही गई

रानी पद्मिनी की बहादुरी और राजपूतों की शौर्य को बयां करती फिल्म पद्मावती जिसको हाल में पद्मावत कर दिया गया है । संजय लीला भंसाली द्वारा निर्मित इस फिल्म में दीपिका पादुकोण , रणवीर सिंह और शाहिद कपूर मुख़्य किरदार के रूप में है । मेवाड़ का गौरव और राजपूताना शौर्य की कथाएं इतनी कमजोर नहीं है कि किसी के तीन घंटे की फ़िल्म बना लेने से उनका इतिहास धूमिल हो जाए । फिर भी पद्मावत को लेकर हंगामा क्यों बरस रहा ? पूरे देश में करणी सेना इस फिल्म का विरोध कर रही है कई जगह आगजनी तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आ रही हैं  । राजपूत सुरक्षा के लिए होते थे वह सुरक्षा प्रदान करते थे लेकिन कुछ राजनीति लाभ के लिए यह सब करना ठीक नहीं । जितनी फिल्म विवादित रही उतना ही चर्चा में बनी रही और इस फिल्म की मार्केटिंग फ्री में ही पूरे देश में हो गई । संजय लीला भंसाली को बहुत बड़े-बड़े बैनर नहीं बनवाने पड़े । सबसे मजे की बात है यह है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दे दी फिर भी राज्य सरकार अपने राज्य में इस फिल्म को दिखाने के लिए मना कर दी । सेंसर बोर्ड सुप्रीम कोर्ट दोनों ने फिल्म को पास कर दिया जो विवादित सीन था उसे  हटा दिया गया उसके बाद भी इसको रिलीज न होने दिया जाए इसका क्या मतलब ठीक है । कोई भी फिल्म आने वाली पीढ़ी के लिए एक कहानी के रूप में एक इतिहास को बयां करती हुई नजर आती है यदि हम उसको ठीक तरीके से प्रस्तुत ना करें तो हम अपनी पीढ़ी को गलत चीज की जानकारी देते रहते हैं इसलिए सभी फिल्म निर्माता से निवेदन आग्रह है कि सही दिखाए क्या चीज सही है गलत है वह बहुत अच्छे ढंग से समझते भी है शायद इसीलिए पद्मावती या पद्मावत बहुत ज्यादा विवादित रही है । पता नहीं आप लोग की क्यो फिल्म का विरोध कर रहे है । मैं तो यह भी नहीं जानता कि आप लोगों ने फ़िल्म देखी भी है या नहीं । वैसे बता दे कि यदि किसी ने फिल्म देखी है वो यही कहता सुनाई दे रहा है कि फ़िल्म को देखने के बाद खिलजी के खिलाफ नफरत और बढ़ जाएगी यही नहीं राजा रतन सिंह और रानी पद्मावती को इतने बेहतरीन तरीके में दर्शाया गया है की इन दोनों की वीरता की कहानी जैसी आपको इतिहास में दिखाइए पढ़ाई गई थी वैसा ही कुछ फिल्म में भी दर्शाया गया है । चाहे गोरा बादल हो चाहे राजा रतन सिंह रानी पद्मावती तक  किसी की भी सम्मान के साथ फिल्में में कोई समझौता नहीं किया गया है और हां आप का डर था की इस फिल्म में अलाउद्दीन खिलजी को हीरो की तरह दर्शाया गया है माफ कीजिएगा ऐसा कुछ नहीं है अलाउद्दीन खिलजी को एक बड़ा किरदार के रूप में जरूर दिखाए गया है बाकी अब तो फ़िल्म रिलीज हो ही चुकी है देखते है की करनी सेना और सुप्रीम कोर्ट में कौन सम्मानीय है ।
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एम के पाण्डेय निल्को