11 अक्तूबर, 2018

गंगा मइया की रक्षा के लिए अनशन पर बैठा एक संत अमर हो गया |

लंबे समय से मां गंगा की स्वच्छता और रक्षा की मांग कर रहे पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल की गुरुवार को मौत हो गई। उन्‍हें स्वामी सानंद के नाम से जाना जाता था। स्वामी सानंद पिछले 112 दिनों से अनशन पर थे और उन्होंने 9 अक्टूबर को जल भी त्याग दिया था। उन्‍होंने ऋषिकेश में दोपहर एक बजे अंतिम सांस ली। वह 87 साल के थे। सानंद गंगा नदी की स्वच्छता को लेकर प्रयासरत थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिख चुके थे। 

जीडी अग्रवाल आईआईटी कानपुर में सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख थे। उन्होंने राष्ट्रीय गंगा बेसिन प्राधिकरण का काम किया। इसके अलावा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पहले सचिव भी रहे।

गंगा समेत अन्य नदियों की सफाई को लेकर जीडी अग्रवाल ने पहली बार 2008 में हड़ताल की थी। मांगें पूरी कराने के लिए उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को अपना जीवन समाप्त करने की धमकी भी दी। वे तब तक डटे रहे, जब तक सरकार नदी के प्रवाह पर जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण को रद्द करने पर सहमत न हुई।

जुलाई 2010 में तत्कालीन पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री जयराम रमेश ने व्यक्तिगत रूप से उनके साथ बातचीत में सरकार के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। साथ ही, गंगा की महत्वपूर्ण सहायक नदी भागीरथी में बांध नहीं बनाने पर सहमति भी जताई।

2014 में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की स्वच्छता के लिए प्रतिबद्धता दिखाई थी। इसके बाद जीडी अग्रवाल ने आमरण अनशन खत्म कर दिया था। हालांकि, सरकार बनने के बाद से अब तक ‘नमामि गंगे’ परियोजना का सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। ऐसे में अग्रवाल ने 22 जून, 2018 को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृसदन आश्रम में दोबारा अनशन शुरू कर दिया।

अग्रवाल 2012 में पहली बार आमरण अनशन पर बैठे थे। इस दौरान राष्ट्रीय गंगा बेसिन प्राधिकरण को निराधार कहते हुए उन्होंने इसकी सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया। साथ ही, अन्य सदस्यों को भी यही करने के लिए प्रेरित किया। पर्यावरण के क्षेत्र में उनकी प्रतिष्ठा को देखते हुए उनके हर उपवास को गंभीरता से लिया गया।

10 जुलाई, 2018 को पुलिस ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे जीडी अग्रवाल को जबरन उठा लिया और एक अज्ञात स्थान पर ले गए। अग्रवाल ने इसके खिलाफ उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 12 जुलाई, 2018 को उत्तराखंड के मुख्य सचिव को आदेश दिया कि जीडी अग्रवाल से अगले 12 घंटे में बैठक करके उचित हल निकाला जाए। इसके बावजूद कुछ भी सार्थक परिणाम नहीं निकला।

सरकार ने वयोवृद्ध पर्यावरणविद को ऋषिकेष स्थित एम्स में हिरासत में ले लिया। यहां चिकित्सकों के जबरदस्ती करने पर भी उन्होंने भोजन नहीं किया। 9 अक्टूबर से जल भी त्याग दिया था। इस दौरान सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने उनसे अनशन खत्म करने का आग्रह किया, जिसे स्वामी सानंद ने अस्वीकार कर दिया था।

03 अक्तूबर, 2018

स्वच्छता अभियान पर दो टूक - ब्रजेश पाण्डेय

सबसे पहले देश के दो महान सपूत बापू और शास्त्री जी को नमन। बापू ने स्वछता के प्रति हमें जगाया तो शास्त्री जी ने जय जवान-जय किसान का नारा दिया। स्वच्छ्ता अभियान का शुभारम्भ आज ही के दिन आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने किया। उन्हें भी मेरा कोटि-कोटि प्रणाम। लेकिन मन में एक सवाल चुभता है कि हम कितना स्वच्छ हैं और देश का जवान-किसान कितना खुशहाल। स्वच्छता अभियान को लेकर झाड़ू लगाने का दौर पिछले चार साल से चल रहा है। तकरीबन 50 फीसद हम सफल भी हुए हैं। यह आंकड़ा और भी बढ़ता जब हम सिर्फ मीडिया में स्वच्छता का ढोंग न रचते। जैसा की अपने कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की आदत है। पहले अपने घर की गंदगी साफ़ करनी होगी।तन-मन दोनों की सफाई जरूरी है। लेकिन यहां तो सफाई का बजट भी साफ़ करने में बंदे पीछे नहीं हैं। बजट पर नहीं जाऊँगा क्योंक़ि सफाई मद पर जितना प्रदेश को मिलना था, एक तिहाई मिला। जो मिला उसमें से भी तथाकथित लोगों ने कमीशन बनना शुरू कर दिया। मेरा अपना विचार है कि जब तक करप्शन की सफाई नहीं होगी। संसद की गंदगी दूर नहीं की जायेगी, संपूर्ण स्वच्छ्ता पर बात बेमानी होगी।

अब बात जवानों और किसानों की। जवान सीमा पर कितना सुरक्षित हैं, आप जानते हैं। आपको यह भी पता होगा कि बापू, नेहरू और शास्त्री जी जैसे लोग कभी सुरक्षा में जवानों की फौज नहीं लेकर चलते थे। उनकी दृढ इच्छा शक्ति ही, उनके लिए ढाल का काम करता था। जब अच्छे-बुरे कर्मो का हिसाब-किताब करके इस दुनिया से सबको चले जाना है तो फिर नेताओं और मंत्रियों की सुरक्षा पर करोड़ो रुपये जनता का क्यों खर्च हो रहा। इस रकम से तो देश की सीमा को और भी मजबूत किया जा सकता है। किसान जिंदगी भर मेहनत करते-करते सिर्फ दो जून की रोटी, तन ढकने के लिए कपड़ा और रहने के लिए दो कमरे बना लेता है, लेकिन वह तो कभी लक्जरी गाडी में बैठने का भी सपना नहीं देख पाता। तो फिर क्या शास्त्री जी का नारा अधूरा नहीं लगता। बात कड़वी जरूर लगेगी मित्रों, लेकिन सही मायने में सबका साथ, सबका विकास का दंभ भरने वाली अपनी सरकार सिर्फ अपने नेताओं और पूंजीपतियों के लिए ही कार्य कर रही है।
यदि मेरी बातें आपको बुरा लगे तो क्षमा कीजियेगा।
सादर
ब्रजेश पाण्डेय
दैनिक जागरण गोरखपुर