31 जनवरी, 2019

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है


ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है 
क्यों तुम्हे दर्द से इतना प्यार है 
कलम लिखने को बहुत बेक़रार है 
क्योंकि इश्क खुद ही आज बीमार है 
ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है

प्रकृति ने खुद किया तुम्हारा शृंगार है 
उनकी चाहत भी बेशुमार है 
मैसेज के साथ साथ ऑडियो भी भेज दिया 
पर किया नहीं आज  तक इजहार है 
ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है

लेकिन तेरा आशिक बहुत दिलदार है 
प्यार ही जीवन का आधार है 
सोच रहा हूँ क्या लिखू तुम पर 'निल्को'
वो कहती है तुम्हारी कलम,कैमरा, कम्प्यूटर सब लाजवाब है 
ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है
एम के पाण्डेय निल्को 

3 टिप्‍पणियां:

  1. अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराएं

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (02-02-2019) को "हिंदी की ब्लॉग गली" (चर्चा अंक-3235) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. आदरणीय शास्त्री जी बहुत बहुत आभार यूँ ही आशीर्वाद बनाये रखें

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